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आलू बुखारा के फायदे और नुक्सान – Aloo Bukhara Benefits in Hindi

आलू बुखारा

Last Updated on: 1st March 2021, 03:06 pm

आलू  बुखारा स्वाद में खट्टा-मीठा एवं गुठलीदार फल हैं जो ज्यादातर गर्मियों में मौसम में होता हैं|यह पौष्टिक फलों की श्रेणी में आने वाला फल हैं क्योकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन्स और मिनरल पाए जाते हैं| आलू बुखारा को का वैज्ञानिक नाम प्रूनस डोमेस्टिका हैं|आलू  बुखारा आकर में लीची जितना या लीची से थोड़ा बड़ा होता हैं|यह गहरा बैगनी रंग का गूदेदार फल होता हैं|

आलू बुखारे पर महत्वपूर्ण जानकारी इस लेख में

आलू  बुखारा के अन्य नाम

अलग-अलग भाषाओं में आलू बुखारा को अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं हम उनमे से कुछ नामों की जानकारी आपके लिए यहाँ लिख रहे हैं| Hindi में आलूबुखारा तथा English में  गार्डन प्लम (Garden plum )यूरोपियन प्लम (European plum)  प्लम ट्री (Plum tree) कहा जाता हैं|

Kannada में आलूबुखारा को  अलबोखाला (Albokhala) तथा अरुकम (Arukam) कहा जाता हैं| Gujarati में आलू  बुखारा को  पीच (Peach) तथा आलूबुखारा (Alubukhara) भी कहा जाता हैं| Tamil में आलू  बुखारा को अलुप्पुक्काराप्लम (Aluppukkarappalam) कहा जाता हैं|

तथा Telugu में आलू  बुखारा को  अलपागोडापाण्डु (Alpagodapandu) कहा जाता हैं|

Sanskrit  में आलू बुखारा को आल्लूक, अल्लू, रक्तफल, भल्लूक तथा Bengali में आलू बुखारा को   आलूबुखारा (Alubukhara) ही कहा जाता हैं|Malayalam में आलू बुखारा को अरुकम् (Arukam)

तथा Nepali में आलू बुखारा को आरु बखाड़ा (Aru bakhada) ही कहा जाता हैं|

इनके अलावे Arabic में आलू बुखारा को  बरकफक (Barkuk) तथा Persian में  शफतालू (Shaftalu) कहा जाता हैं|यूरोप में आलू बुखारा को प्रुनसडोमेस्टिका तथा जापान में आलू बुखारा को प्रूनससालिसिना कहा जाता हैं|

आलू बुखारा की खेती

आलू बुखारा पर्णपाती वृक्ष होते हैं|पर्णपाती वृक्ष वैसे वृक्षों को कहते हैं जो हर साल के किसी भी मौसम में अपने पत्ते को गिरा देता हैं|आलू बुखारा की खेती ज्यादातर अमेरिका तथा अफगानिस्तान में की जाती हैं|

आलू बुखारा की उत्पत्ति

आलू बुख़ाता का जन्म स्थल यूरोप के दक्षिण-पूर्व हिस्सों एवं पक्ष्चिमी एशिया के काकेशिया एवं कैस्पियन सागर के क्षेत्र को माना जाता हैं| आलू बुखारा की ही एक प्रजाति प्रूनस सैल्सिना जिसका

उपयोग जैम बनाने में किया जाता हैं का जन्म स्थल चीन माना जाता हैं|

भारत में आलू बुखारा की खेती

भारत में आलू बुखारा की खेती उत्तराखंड हिमाचल प्रदेश एवं कश्मीर में की जाती हैं|

आलू बुखारा की खेती के लिए उपयुक्त भूमि

आमतौर पर आलू बुखारा को किसी भी तरह के जमीन पर उगाया जा सकता हैं यदि जल निकाशी का का उचित प्रबंध हो तो|आलू बुखारा की खेती पर्वतीय एवं मैदानी दोनों तरह के क्षेत्रों में की जाती हैं|

आलू बुखारा की खेती समुद्र तल से 900 मीटर से 2500 मीटर की उचाई वाले भूमि पे की जाती हैं| आलू बुखारा के लिए  गर्म एवं ठंडी दोनों जलवायु भी उपयुक्त हैं|

आलू बुखारा की किस्म

फन्टियर

आलू बुखारा  की ये किस्म भरी किस्म की होती हैं| फल बड़े-बड़े आकर के और भारी होते हैं| आलू बुखारा  की इस किस्म में छिलके गहरे लाल या बैगनी एवं फल गहरे लाल रंग का होता हैं| इस किस्म के फल स्वाद में मीठा होता हैं|इस किस्म में फल गूदे से आसानी से अलग हो जाते हैं|

रैड ब्यूट 

रैड ब्यूट आलू बुखारा  माध्यम आकार वाले किस्म की फल हैं जिसके छिलके लाल एवं गूदे पिले होते हैं|रैड ब्यूट स्वाद में मीठा होता हैं लेकिन इसके फल गुठली से चिपके रहते हैं|

आलू  बुखारा(plum )

आलू बुखारा का यह किस्म फन्टियर से छोटा एवं रैड ब्यूट से बड़ा होता हैं|आलू बुखारा के इस किस्म में छिलके पीला या लालिमा लिए हुए होते हैं एवं गुदा पीला होता हैं जो गुठली के साथ चिपका हुआ होता हैं|

पकने के आधार पर आलू बुखारा की उन्नत किस्मे

आलू बुखारा की ये किस्मे समुद्र तल से 2000 मीटर की ऊँचाई भी अधिक  क्षेत्रों के लिये आलू बुखारा  की प्रमुख किस्में निम्लिखित हैं –

आलू बुखारा की जल्दी पकने वाली किस्मों में रामगढ़ मेनार्ड  फर्स्ट प्लम  न्यू प्लम आदि प्रमुख है| आलू बुखारा की मध्य समय में पकने वाली किस्मों में  सेन्टारोजा विक्टोरिया आदि प्रमुख है| आलू बुखारा की देर से पकने वाली किस्मों में  मेनार्ड मैरीपोजा सत्सूमा आदि प्रमुख है|

आलू बुखारा में पाए जाने वाले पोषक तत्व प्रति 100 ग्राम फल पर

जल  87.23

प्रोटीन  0.70 ग्राम

ऊर्जा  46 किलो कैलोरी

कार्बोहाइड्रेट  11.42 ग्राम

फाइबर  1.4 ग्राम

कुल फैट  0.28  ग्राम

शुगर  9.92 ग्राम

आलू बुखारा के प्रति 100 ग्राम पर पाए जाने वाले मिनरल्स

आयरन  0.17 मिलीग्राम

मैग्नीशियम  7 मिलीग्राम

कैल्शियम  6 मिलीग्राम

जिंक  0.10 मिलीग्राम

फास्फोरस P  16 मिलीग्राम

पोटैशियम, K  157 मिलीग्राम

आलूबुखारा के प्रति 100 ग्राम में पाया जाने वाला  विटामिन

थायमिन   0.028 मिलीग्राम

विटामिन सी  9.5 मिलीग्राम

नियासिन  0.417  मिलीग्राम

राइबोफ्लेविन  0.026 मिलीग्राम

फोलेट DFE   5 µg

विटामिन बी-6  0.026 मिलीग्राम

विटामिन  IU  345IU

विटामिन  RAE  17µg

विटामिन K   6.4µg

विटामिन E (अल्फाटोकोफेरॉल)  0.26 मिलीग्राम

आलू बुखारा के प्रति 100 ग्राम में पाया जाने वाला  लिपिड

फैटी एसिड सैचुरेटेड  0.017 ग्राम

फैटी एसिड कुल पॉलीअनसैचुरेटेड  0.044 ग्राम  

फैटी एसिड कुल मोनोअनसैचुरेटेड   0.134 ग्राम

आलू बुखारा एवं सूखा आलू बुखारा के बिच अंतर

आलूबुखारा के फल रस एवं गूदे से भरा हुआ होता हैं जिसे फल की तरह खाया जाता हैं|जब आलू बुखारा को सूखा दिया जाता हैं तो यह मेवे की तरह उपयोग किया जाता हैं|आलूबुखारा को इंग्लिश में plum एवं सूखे आलूबुखारा को इंग्लिश में प्रून्स कहते हैं|

आलू बुखारा में मुलायम गुदा होता हैं जबकि सूखा आलू बुखारा चिपचिपा हो जाता हैं|सूखा आलू बुखारा में  पौष्टिक तत्व की मात्रा में बदल जताई हैं जैसे सूखे आलू बुखारे में  फाइबर अधिक होती हैं और आलू बुखारे में फाइबर कम|

इसी तरह आलू बुखारे में विटामिन c अधिक पायी जाती हैं तो सूखे आलू बुखारे में विटामिन c कम पायी जाती हैं| बाज़ार में उपलब्धता के आधार पे देखा जाए तो सूखा आलू बुखारा पुरे वर्ष बाज़ार में उपलब्ध होता हैं लेकिन आलू बुखारा मई से अक्टूबर के बिच बाजार में उपलब्ध होता हैं|

अब आते हैं आलू बुखारे को खाने से होने वाले लाभ से वैसे देखा जाये तो आलू बुखारा में बहुत सारे पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं जिसको खाने से लोगों को बहुत सारे रोग में लाभ होगा लेकिन वो कहा जाता हैं ना किसी भी चीज़ की अधिकता बुरी होती हैं  तो आलू बुखारा की भी अधिकता कुछ रोगियों या सामान्य व्यक्तियों के लिए भी हानिकारक हो सकती हैं|

आलू बुखारा खाने के फायदे | Benefits of aalo bukhara in Hindi

गंजापन की समस्या से निजात दिलाने में

बढ़ती उम्र के साथ साथ लोगों के बाल भी घटने लगते हैं|बाल झरने की वजह से चेहरे की सुंदरता कम होने लगती हैं |गंजापन दूर करने के लिए आलू बुखारा के तने से निकलने वाले गोंद में सिरका मिला कर सर पर लगाए इससे आपका गंजापन दूर होता हैं|

दाद या खुजली में

दाद या खुजली से परेशान लोगों के लिए भी आलू बुखारा फायदेमंद होता हैं|

अत्यधिक प्यास की समस्या से निजात

कुछ लोगों को बार बार प्यास लगती रहती हैं बार बार प्यास लगना भी एक प्रकार की समस्या ही हैं जिससे निजात पाने के लिए आलू बुखारा का सेवन करने से लाभ होता हैं|

हृदय रोग में असरदार

उच्च रक्त चाप से रक्त नालियों पर दवाब पड़ने लगते हैं जिससे ह्रदय रोग होने का खतरा हो जाता हैं| सूखा आलूबुखारा उच्च रक्त चाप को नियंत्रित करता हैं जिससे लोगों को ह्रदय रोग का खतरा कम हो जाता हैं|

एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) से वचाव में सहायक

एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) में आर्टरी वेल्स में कोलेस्ट्रॉल फैट और प्लाक जमने लगता हैं जिस वजह से शरीर में बहने वाले रक्त प्रभावित हो जाते हैं जिससे शरीर के अंदर खून के थक्के जमने लगते और ह्रदय रोग का खतरा बढ़ जाता हैं| सूखा आलूबुखारा  एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) से वचाव में सहायक होता हैं|

बदहज़मी में

ज्यादा भारी खाना या अधिक मात्रा में खा लेने से भोजन ठीक से पच नहीं पता और बदहज़मी हो जाती हैं|यदि आप बार-बार होने वाली बदहज़मी से परेशान हैं तो आप आलू बुखारा की बीजों को अच्छी तरह से सूखा ले और इसका सेवन करे|

कब्ज में भी राहत

कब्ज में मल त्याग में समस्या आने लगती हैं| आलू बुखारा में फेनोलिक कंपाउंड पाए जाते हैं जो कब्ज को दूर करते हैं|कब्ज में फेनोलिक कंपाउंड के अलावा फाइबर भी पाए जाते हैं जो कब्ज दूर करने में सहायक होते हैं|

वजन नियंत्रण में सहायक

आलू बुखारा के प्रत्येक 100 ग्राम में 46  ग्राम  कैलोरी पाया जाता हैं जो दूसरे फलों की तुलना में काफी कम हैं इसलिए आपके आलू बुखारा खाने से आपका वजन नहीं बढ़ने वाला हैं इसके अलावा आलू बुखारा सैच्युरेटेड फैट नहीं होता हैं जिससे इसको खाने से आपका वजन नहीं बढ़ता|आलू बुखारा में प्रचुर मात्रा में पाया फाइबर पाया जाता हैं जो वजन घटाने में सहायक होता हैं|

हड्डियों को स्वस्थ रखने में सहायक

सूखा आलू बुखारा में बोन मिनरल डेंसिटी सुधारने की क्षमता होती हैं|जिन्हे अस्थि रोग की समस्या हैं उन्हें रोज़ 100 ग्राम सूखा आलू बुखारा खाना चाहिए इससे हड्डियां स्वस्थ होती हैं|

कैंसर से लड़ने में सहायक

कुछ शोध की माने तो सूखे आलू बुखारा में पाए जाने वाले  फाइबर और  पॉलीफेनोल्स कैंसर की खतरे को कम करते हैं|आलू बुखारा का अर्क भी महिलाओं में होने वाले स्तन कैंसर के जोखिम को कम करता हैं|इसलिए आलू बुखारा हो या सूखा आलू बुखारा दोनों के ही सेवन से कैंसर जैसे खतनाक रोग के जोखिम को कम करते हैं|

शुगर को कम करने में सहायक

यु तो आलू बुखारा मीठा फल हैं परन्तु यदि आप शुगर के रोगी हैं तो भी आपको डरने की बिलकुल भी जरुरत नहीं हैं आप सूखे आलू बुखारा को आराम से स्नैक्स के जैसा भी खा सकते हैं या आलू

बुखारा को भी बड़े आराम से खा सकते हैं| क्योकि आलू बुखारे में पाए जाने वाले बायोएक्टिव कंपाउंड शुगर के जोखिम को कम कर सकते हैं|

कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक

सूखे आलू बुखारा में फाइबर प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं|फाइबर शरीर में उपस्थित कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता हैं|सूखे आलू बुखारा को रोज़ाना अपने आहार में उचित मात्रा में शामिल कर लेने से यह  LDL अर्तार्थ bad कोलेस्ट्रॉल को कम करता हैं|

प्रतिरक्षा प्रणाली बढ़ाने में सहायक

आलू बुखारा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा कर रोग से लड़ने की क्षमता को बढाती हैं|आलू बुखारा में विटामिन A पाया जाता हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने में सहायक होने के साथ-साथ आँखों के लिए भी लाभ दायक होता हैं|

आलू बुखारा में विटामिन c भी पाया जाता हैं जो रोग प्रति रोधक क्षमता को बढ़ाता हैं|ज्ञात हो की विटामिन E अन्य विटामिन की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में अधिक सहायक हैं|

आखों के लिए लाभदायक

आँखों के लिए सूखा आलू बुखारा एवं आलू बुखारा दोनों ही फायदेमंद हैं क्योकि इनमे विटामिन A विटामिन C एवं विटामिन E पाया जाता हैं जो आँखों के स्वस्थ के लिए सहायक हैं|

विटामिन A रेटिना की कोशिकाओं की प्रक्रियाओं को बढ़ाता हैं जिससे आखों की दृष्टि क्षमता बढ़ती हैं|

एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी से होने वाली बीमारी से वचाव

जब शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी होती हैं तो शरीर में फ्री रेडिकल्स बढ़ने लगते हैं|फ्री रेडिकल्स की वजह से शरीर में अनेकों तरह की बीमारियां होने लगती हैं जैसे आखों के लेंस में खराबी आना जिससे दृष्टि सम्बंधित बीमारिया होने लगती हैं|

एंटीऑक्सीडेंट्स की कमी से जब फ्री रेडिकल्स  शरीर में बढ़ने लगते हैं जिससे आखों के अलावा जोड़ो के रोग जैसे गठिया एवं ह्रदय सम्बंधित रोग और मस्तिष्क सम्बंधित रोग होने लगते हैं जिस वजह से शरीर में अनेकों गंभीर बीमारियां हो जाती हैं|

इन बिमारियों से बचने के लिए आलू बुखारा का सेवन करना चाहिए क्योकि आलू बुखारा में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो  फ्री रेडिकल्स को जमा होने से बचाते हैं जिससे शरीर कई गंभीर बिमारियों से बचा रहता हैं|

आलू बुखारा के अधिक सेवन से होने वाले नुकसान | Side effects of aalo bukhara in Hindi

आलू बुखारा के अधिक सेवन से हो सकता हैं की आपको कोई हानि पहुंच जाये जैसे आलू बुखारा में फाइबर पाया जाता हैं जो कब्ज से राहत दिलाता हैं लेकिन आप अधिक मात्रा में आलू बुखारा का सेवन कर लेंगे तो हो सकता हैं की आपको डायरिया हो जाये|

आलूबुखारा में लेक्सेटिव गुण भी पाया जाता जिसका कार्य पेट साफ़ करना होता हैं परन्तु आप अधिक मात्रा में आलू बुखारा खा लेंगे तो हो सकता हैं आप डायरिया से पीड़ित हो जाये|आलू बुखारा में पोटैशियम भी अधिक मात्रा में पायी जाती हैं यदि आप अधिक मात्रा में आलू बुखारा का सेवन कर लेंगे तो आपको उल्टी साइन में दर्द जी मिचलाना जैसे समस्यायों का सामना करना पड़ सकता हैं|

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